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पंचायत आरक्षण रोस्टर पर हाईकोर्ट में सुनवाई, फैसला टला – अंतरिम आदेश नहीं, 11 मई को अगली सुनवाई


हाईकोर्ट ने पंचायत आरक्षण रोस्टर पर नहीं दिया अंतरिम आदेश
राज्य सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश, अगली सुनवाई 11 मई
चुनाव तारीखों का ऐलान जल्द संभव, 3757 पंचायतों में होना है मतदान



शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में पंचायती राज संस्थाओं के आरक्षण रोस्टर को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई हुई, लेकिन कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया। अब इस अहम मामले की अगली सुनवाई 11 मई को निर्धारित की गई है, जिससे चुनाव प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिक गई हैं।

मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की बेंच में हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह याचिकाओं में उठाए गए सभी मुद्दों पर विस्तृत जवाब दाखिल करे। ऐसे में फिलहाल आरक्षण रोस्टर पर स्थिति यथावत बनी हुई है और अंतिम फैसला अगली सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।

दरअसल, राज्य के सभी जिलाधीशों (DC) ने 7 अप्रैल को पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर जारी किया था। इसके खिलाफ कई याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि आरक्षण लागू करने के नियमों की अनदेखी की गई और कई जगहों पर जनसंख्या के वास्तविक आंकड़ों को दरकिनार कर सीटों का आरक्षण किया गया।

याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि कुछ स्थानों पर लगातार तीसरी बार सीटों को आरक्षित करने या अधिसूचनाओं का मनमाने ढंग से उपयोग किया गया है, जिससे रोस्टर में गड़बड़ी हुई है। यही कारण है कि अब जिन पंचायतों या वार्डों में आरक्षण लागू हुआ है, वहां के लोगों को कोर्ट के फैसले से बदलाव की उम्मीद है।

इधर, स्टेट इलेक्शन कमीशन पंचायत और नगर निकाय चुनाव की तैयारियां लगभग पूरी कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 31 मई से पहले हर हाल में चुनाव करवाने हैं, ऐसे में चुनाव की तारीखों का ऐलान कभी भी हो सकता है।

जानकारों का मानना है कि चुनाव आयोग मौजूदा रोस्टर के आधार पर ही चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ा सकता है, हालांकि कोर्ट में चल रही सुनवाई के चलते स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

प्रदेश में इस बार 3757 पंचायतों और 73 नगर निकायों में मतदान होना है, जिनमें सोलन, मंडी, धर्मशाला और पालमपुर नगर निगम के चुनाव भी शामिल हैं। नगर निगम चुनाव पार्टी चिन्ह पर होने के कारण राजनीतिक रूप से भी यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

कुल मिलाकर, हाईकोर्ट में मामला लंबित होने और चुनाव की तारीखों के संभावित ऐलान के बीच प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।